Sunday, November 20, 2016

JOURNALS




S.NO
TOPIC
REMARKS
1.
significant life experiences

2.
observations of life situations that evoke questions and responses

3.
questions on education, learning and teaching

















  1              जो मुझे हमेशा याद रहेगा



     यह बात उस समय की है जब मैं दसवी कक्षा मैं थी  2010 की | मार्च  का महीन अता और मेरे बोर्ड की परीक्षाओं का समय चल रहा था | मेरी अंग्रेजी की परीक्षा थी और रात के तीन बजे मैं अकेले बैठ  कर पढ़ रही थी | मेरी बहन जो की बहुत ज़यादा शरारती है उसने मुझे उस दिन भी नही छोड़ा उर अपनी खुराफाती शरारतो को मेरे साथ किया |मई चुप चाप बैठ  कर  पढ़ रही थी लेकिन आचानक मुझे लगा की कोई मेरे बराबर मैं आके खड़ा हुआ है| मैंने अपनी आँखे बंद कर  ली और सोचने लगी की शायद ज़यादा पढाई की वजह से मैं  पागल हो गयी हों मैंने पांच मिनट

बाद अपनी आँखे खोली और मैंने देखा की अभी भी कोई खड़ा है मेरे अंदर इतनी भी हिमत नही थी की मैं देख सकों वो कोन है मैं बहुत ज्यादा डर गयी थी | जब मैंने धीयान से देखा तो कोई सफ़ेद कपड़ो मैं खड़ा था और उसके बाद तो मैंने चिलाना शुरू कर दिया मेरे चिलाने की सब से बड़ी वजह थी रात के  तीन बजे  किसी को सफेद कपड़ो मैं देखना |और वो और कोई नही मेरी बहिन सूफिया मिराज थी जिन्होंने चाहा था की मेरा डर निकल जायेगा बल्कि उस के बाद मेरा डर निकलने की जगह ज़यादा बढ़ गया | सूफिया को मम्मी पाप से इस घटना के बाद बहुत डांट पड़ी आज भी उस  दिन के  बारे मैं सोच कर हस्ती हों मगर आज भी मैं डरती हों |







निष्कर्ष  [आपने विचार ]

      आखिर मैं हमने  यही सिखा की हममे  नही पता की किस के  साथ जीवन मैं क्या हुआ है कोन कितना दुखी है अंदर से , तो हम सब को कही ना कहीं एक  दुसरे के साथ अच्छा बर्ताव करना चाहिए क्युइकी हमने किसी के मन को नही पड़ा है | क्युकी बहुत सारे कागज़ ऐसे भी थे जिन्हें पढ़  कर  मैडम और सुन  कर सभी  छात्र भी रो  रहे



When I believed in my self



यह बात 2012 की है जब एडमिशन का प्रोसेसेस शुरू हो चूका था। और मई भी अपने दोस्तों की हु तरह बहुत खुश थी। मुझे Delhi university  के  MATA SUNDRI COLLEGE FOR WOMENS  मैं एडमिशन मिला लेकिन वह मेरी किसी और दोस्त को एडमिशन नही मिल पाया था मई कॉलेज के शुरू शुरू के दिनों मई बहुत इन सिकियुर रहती थी। और कॉलेज का महूल भी मेरे लिए बहुत अलग था मैं ज़्यादा तक सूट ही पहनती थी और मेरी क्लास के बच्चे सूट पहनने एल लड़कियुं के बेटे मई बहुत बाते करते थे। की आंटी जी की तरह सूट पहनती है ये। मुझे धीरे धीरे इन बातों का पता चल गया और मैं ये सोच लिया की इनको कुछ क्र के दिखाना है।

      यह बात 2013 की है ।मुझे कॉलेज मई हुए इक साल हो चूका था और हमारा रिजल्ट पहले साल का गया था। मैंने अपने पसंदीदा विषय मई टॉप किया था  मैंने उर्दू मैं टॉप किया था मेरे 82%आये थे मेरे से ज़्यादा ये मेरे माता पिता के लिए गर्व और ख़ुशी की बात थिमुझे मेरी पहली ट्रॉफी 07-04-2014 मैं मिली थी।

    इसके बाद मेरे अंदर इक आत्मविश्वास बढ़ता चला गया। मैंने ये एहसास अपनी क्लास के बच्चों को दिलाया कि ज़रूरी नही अपनी अछि छवि बनाने के लिए हम अपने एस्प को बदल लें अपबे पहनावे को बदल लें नही बल्कि हम वेसे भी अछि छवि बना सकते हैं जैसे हम हैं 20014,2015 तक मैंने अपने कॉलेज से 5 ट्रॉफी और 12 सर्टिफिकेट अलग अलग चीज़ों मई हासिल किये

     मैं लोगो की सोच को बदलना चाहती हूं लोग ये सोचते हैं कि सूट पहने वाली लडकिया 4 दिवारी तक सिमित रगती है बल्कि यह गलत है।क्योंकि modern  होने के लिए मॉडर्न कपड़ो की नही बल्कि  modern  सोच की ज़रूरत होती है

















When my confidence level increase



यह बात 2014 की जब तक मेरे हाथ में मेरी मेहनत की लायी होइ 4 ट्रॉफी चुकी थी।मैंने अब अपने आप को पढाई के साथ साथ कॉलेज के कामो मई भी लगा लिया था। जैसे मैं क्लोज की मैगज़ीन की एडिटर बनी मई ग़ज़ल प्रतियोगिता डिबेट प्रतियोगिता जैसी चीज़ों को आर्गनाइज्ड कराया मैंने  Nizami Brothers को भी कॉलेज मई बुलाया। इन सभी चीज़ों पर मैंने जाम किया पर कहि अभी भी कमी थी।

    यह बात 5 जनवरी की है ममी अपने दोस्तों के साथ क्लास के बाद कैंटीन की सिडियूं पर बैठी होइ थी मैं उदास थी क्योंकि क्लास से निकलते समय नोटिस बोर्ड पर जो नोटिस मैंने देखा था मुझे उसमे जाना था पर साथ मैं कोई जाने को तैयर नही था। नोटिस डिबेट प्रतियुगीता का था मेरे पूरा धियान वही लगा हुआ था कुछ ही समय मैं मेरे पास इक लड़की आती है और मुझ से मेरा नाम लेकर पूछती की क्या आप इक़रा दी हो मई समझ नही पाती हों की ये कोण है वो दुबारा सवाल करती है और मई हाँ मई जवाब दे देती हूं। वो मुझे बता है कि उससे मेरी इक टियाचर नई मेरे पास भजेज है और वो मुझे बुला रही है मैं स्टाफ रूक्म मैं जातीं हों और मेरी टीचर मुझ से नाराज़ हो जर कहती है कि इक़रा अभी तक तम्हारा नाम क्यों नही आया मेरे पास डिबेट प्रतियुगीता के लिए मैं उनको सारीबाट बता देती हूं। उसके बाद वो मुझे कहती है कि जो तम्हाराई परेशानी वो इस लड़की की भी जो तुम्हे बुला कर लायी है उसकी भी यह परेशानी है ऐसा करो तुम दोनों साथ मैं इक दूसरे के साथ मिल कर काम करो दोनों की परेशानी खत्म हो जायेगी। और मैं चाहती हूं कि तुम दोनी ही इसमें भाग लो। वो पल मेरे लिए बिलकुल ऐसे थे जैसे वो लड़की मेरे लिए फरिश्ता बन क्र आयी हो। मैंने और उसने तैयारी शुरू क्र दी इर हम पूरी तरह उस दिन के इंतज़ार मई यह जिसका मई जब से इंतज़ार कर रही थी और आखिर वो दिन ही गया।

   प्रतियुगीता शुरू हो गयी थी सब अपना अपना काम शुरू क्र रहे थे सभी अच्छे से बोल रहे थे मेरे ये पहला टाइम था मतलब ये वाला काम पहली बार क्र रही थी मैं। ओरो को देख कर मैं बहुत ज़्यादा नर्वस थी क्योंकि सब बहुत अच्छे से बोल रहे थे अगली बारी मेरी थी मैं बहुत डरी ही थी अब मैं स्टेज पर थी। मई सब को देखदेख रही थी इतने सारे लोग और मई उन सब के सम्मन खड़ी हों कैसे बोली क्या बोलो मैंने अपनी आँखे बंद की और ये सोचा की ये सब बच्चे है और इन सब को कुछ नही पता और मई तो इनको जानती ही नही हों।और आँखे खिल क्र मैंने बोलना शुरू कर दिया मुझे ठीक से याद भी नही है कि मैंने आखिर बोला क्या क्या था। लेकिन मैंने अपना काम पूरा क्र लिया। थोड़ी ही दिएर मई सभी लोग बोल चुके थे और अब रिजल्ट का टाइम था मई बहुत नर्वस थी मुजगे मेरा नाम सुनाई दिया मैंने कहा क्या ये प्रियंका वो हस्स रही थी और मुझे ये समझ नही रहा था कि जय हम फर्स्ट हैं क्या यही बोला है अभी स्टेज पर किसी ने हाँहाँ मेरे कानों ने सही सुना था हमहम फर्स्टफर्स्ट थे। जो की मेरे लिए बहुत ही ख़ुशी की बात थी साथ ही मैं बहुत शोकेड भी थी।  इसके बाद मुझे अपने ऊपर पूरी तरह ये विशवास हो गया कि अगर इंसान चाहे तो वो क्या नही कर सकता मैंने और मेरी साथी नै मिल क्र अलग अलग कॉलगकॉलग मई इस पर काम किया और हमे बहुत से इनाम भी मिले और मैंने खुल कर बोलना शुरू क्र

दीया



































2.  OBSERVATION OF LIFE SITUATIONS    THAT EVOKE QUESTIONS AND RESPONSES



.                     Misleading advertisement

यह बात थोड़े ही समय पहले की जब मसि टीवी की बहुत शुकींन थी और टीवी देखने मई मुझे भहुत आनंद मिलता था लेकिन उसी समय की बात है मैंने चीज़ों के बारे मैं सोचना शुरू कर दिया। मई टीवी को अब ऑब्सेर्वे करने लगी थी इर इक सवाल जो हर टाइम मेरे दिमाग मई घूमता रहता था वो था टीवी मई आने वाले एड्स हर ऐड मई महिलाये ही दिखती थी। पहले तो मैंने इस चीज़ को इग्नोर किया एमजीआर मुझे नही पता की यह चीज़ कब मेरे अंदर सवालो को जन्म देने लगी मेरे अंदर क्यों की भावना आने लगी की हर ऐड लड़कियां क्यों। जहा ज़रूरत नही है वह भी ये हैं और झा ज़रूरत है वह तो हैं ही ऐसा क्यों???????

     अगर भारत अपने आपको पुरुष प्रधान सम्माज मानता है तो टीवी एड्स मई महियाळून का प्रयुग क्यों अगर हम आँखे बंद कर के ये सोचने लगे की वो कौन कोन सी जगह है जहा महिलाओं को प्रयुग किया जा रहा है तो शायद समय कम पड़ जायेगा क्योंकि अगर हम खुद ही सोचें तो सच मई बहुत ज़्यादा चीज़े ऐसी है। मैं ये नही कह रही की हर जगहों से महिलाएं को हटा दिया जाये नही इस तो किया ही नही जस सकता है। मगर जिन जगहों पर ज़रूरत नही है उन जगहों पर से हटाना बेहतर होगा क्योंकि ऐसे ऐसे टीवी एड्स आते है जिन का हम समाज पर ख़ास के बाछो पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है कास क्र के छोटे बच्चो पर इन का बहुत बुरा परभाव पड़ता है।

 इसकी इक वजह बे रोज़ गारी को दे सकते हैं और इक सुझाव ये होगा की सरकार को इसके लिए कोई क़दम उठाना होगा। और इन चीज़ों को खत्म करना होगा।



  

 Why only women sacrifice





यह बात 2015 की है जब हमारे घर के पास वाली आंटी के बारे मैं हम पतापता चला। आंटी के 2 बेटे हैं इक बेटी है उनके बारे मैं हम्म पता चला की उनके बड़े बेटे नै भाग कर शादी की है। उन्होंने यह बात कई सालों से इस लिए छुपा रखा था कि लोग बाते करेंगये। इसलिए वो लोगो को बताना नही चाहते थे क्योंकि उनके बेटे नै इक सिख लड़की से शादी की थी और उससे मुस्लिम किया था। उन्हें लगता था कि लोग पता नही उनके बेटे के बारे मैं क्या बाते बनाएंगये।

   अगले साल उनको अपने बेटे की शादी करनी थी उन का बेटा शादी के लिए तैयार नही हो रहा था

वो इस बात से बहुत परेशान थी की वो तैयार नही हो रहा है। कुछ दिनों बाद पता चला की उनका बेटा भी किसी हुन्दु लड़की से शादी करना चाहता था। आंटी इस बात से बहुत परेशान थी की वो लोगो से क्या कहेंगी लेकिन फिर उन्होंने इक तरीका शुरू कर दिया वो लोगो से ज़्यादा मिलने झूलने लगीं और उन को अपबे बेटे के बारे में बताने लगीं। और कहने ले की बड़ा ही नाइक काम कर रहा है पहले लाधिक को मुसलमान करेगा फिर निकहा करेगा। बार बार वी लोगों को यही बात रहीं थी की पहले लड़की अपने धर्म को अपने मस्त पता कोको चोइडे गई तब निकाह होगा।

     आंटी जी यही बात मुझ बार बार परेशान करती रहती है कि क्यों हर बार हर चीज़ मई इक लड़की को ही सब कुछ छोड़ना पड़ता है क्यों हर बार सब कुछ इक लड़की को ही करना पड़ता है। अगर आंटी की खुद की बेटी कुछ ऐसा करती तो आंटी उससे बुरा भला कहती। लेकिन उनका बेटा किसी और से ये करा रहा था तो वो लोग बाते ना बनाये इसलिए लोगो को यह बोल रहीं थी। क्या हर बार अपने आप को साबित करने के लिए अपने आपको दिखेंदिखने के लिए की मैं सच मई तुम से पियार करती हूं ज़रूरी की अपना धर्म और और अपने मास बाप को छोड़ना पड़े क्या कभी लड़का ये सब नही जर सकता बस इसिलुये मुझे ये बात समझ नही आती।







3. Questions on education, learning and teaching



मैने 2016 मैं बीएड मई एडमिशन लिया था और  एडमिशन लेने  के बाद मैं बहुत ही उत्सुक थी साथ ही बहुत ज़्यादा परेशान भी थी की क्या क्या नया होने वाला है।और जिस बात का मुझे डर था वही हुआ यह भी लोगो की इक सोच बनी होइ थी हर तरह के लोगो के लिए मैं इक हिंदी मध्यम स्टूडेंट हों। और मैं जैसा सोच रही थी यह भी वेसा ही हुआ लोगो की सोच यह पर यही थी या ये खा जाये की है की हिंदी मध्यम स्टूडेंट्स कुछ भी नही क्र सकते लोगो इक दूसरे को उनकी भाषा को लेकर जज क्र रहे हैं। लेकिन हम्म पता है कि भाषा मैने नही रखती है और भाषा कभी भी हमने आगये बढ़ने से रूकभी नही सकती है तो इसलिए मैं यही कहना चाहूंगी कि लोग जैसा सोच रहे है वो सच नही है। वो देख नही पा रहे हैं। कि सभी बचे सामान हैं और हर बचा वो क्र सकता है जो वो चाहता है।


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